अधिकार व कर्त्तव्य

प्रबन्धकारिणी के अधिकार व कर्त्तव्य

1. प्रबन्धकारिणी के अधिकार व कर्त्तव्य -

(अ) जिन उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु समिति का गठन हुआ है उसकी पूर्ति करना और इस आशय की पूर्ति हेतु व्यवस्था करना । (ब) पिछले वर्ष का आय–व्यय का लेखा पूर्णतः परीक्षित किया हुआ प्रगति प्रतिवेदन के साथ प्रति वर्ष साधारण सभा की बैठक में प्रस्तुत करना । (स) समिति एवं उसके अधीन संचालित संस्थाओं के कर्मचारियों के वेतन तथा भत्ते आदि का भुगतान करना। (द) कर्मचारियों, शिक्षकों आदि की नियुक्ति करना । (इ) अन्य आवश्यक कार्य करना जो साधारण सभा द्वारा समय-समय पर सौंपे जाए । संस्था की समस्त चल-अचल संपत्ति, कार्यकारिणी समिति के नाम रहेगी। (छ) संस्था द्वारा कोई भी स्थलवार संपत्ति रजिस्ट्रार की लिखित अनुज्ञा के बिना क्रय / विक्रय द्वारा या अन्यथा अर्जित या अन्तरित नहीं की जाएगी। (ज) विशेष बैठक आमंत्रित कर संस्था के विधान में संशोधन किये जाने के प्रस्ताव पर विचार विमर्श कर साधारण सभा की विशेष बैठक में उसकी स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करेगी। साधारण सभा में कुल सदस्यों 2/3 मत से संशोधित पारित होने पर उक्त प्रस्ताव पारित कर पंजीयक को अनुमोदन हेतु भेजा जावेगा ।

2. अध्यक्ष के अधिकार -

अध्यक्ष साधारण सभा तथा प्रबन्धकारिणी समिति की समस्त बैठकों की अध्यक्षता करेगा तथा सचिव को साधारण सभा में प्रबंधकारिणी की बैठकों का आयोजन हेतु निर्देश जारी करेगा। अध्यक्ष का मत विचारार्थ विषयों में निर्णयात्मक होगा।

3. उपाध्यक्ष के अधिकार -

अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा साधारण सभा तथा प्रबन्धकारिणी की समस्त बैठकों की अध्यक्षता करेगा ।

4. सचिव (मंत्री) के अधिकार -

1. साधारण सभा एवं प्रबंध कारिणी की बैठक समय-समय पर बुलाना और समस्त आवेदन पत्र तथा सुझाव जो प्राप्त हों प्रस्तुत करना । 2. समिति की आय-व्यय का लेखा परीक्षण से प्रतिवेदन तैयार करके साधारण सभा के सम्मुख प्रस्तुत करना । 3. समिति के सारे कागजातों को तैयार करना तथा करवाना उनका निरीक्षण करना व अनियमितता पाये जाने पर उसकी सूचना प्रबंधकारिणी को देना । 4. सचिव को किसी कार्य के लिये एक समय में रूपये 500 / - व्यय करने का अधिकार होगा ।

5. संयुक्त सचिव के अधिकार -

सचिव की अनुपस्थिति में संयुक्त सचिव कार्य करेगा ।

6. कोषाध्यक्ष का अधिकार -

समिति की धनराशि का पूर्ण हिसाब रखना तथा सचिव या प्रबंधकारिणी समिति द्वारा स्वीकृत व्यय करना ।