अतिरिक्‍त जानकारी

अतिरिक्‍त जानकारी

1. बैंक खाता -

प्रत्येक समिति द्वारा पंजीकृत संस्था के नाम से ही खाता संधारित किया जावेगा । संस्था की समस्त निधि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक या पोस्ट ऑफिस में रहेगी धन का आहरण अध्यक्ष एवं सचिव के संयुक्त हस्ताक्षरों से होगा ।

2. पंजीयक को भेजी जाने वाली जानकारी -

अधिनियम की धारा 27 के अंतर्गत संस्था की वार्षिक आमसभा होने के दिनांक से 45 दिन के भीतर निर्धारित प्रारूप में शुल्क सहित कार्यकारिणी समिति की मूल हस्ताक्षरित सूची फाइल की जावेगी तथा धारा 28 के अंतर्गत संस्था का आडिटेड लेखा नियत शुल्क के साथ पंजीयक को प्रस्तुत किया जावेगा ।

3. संशोधन -

संस्था के विधान में संशोधन साधारण सभा की बैठक के कुल सदस्यों के 2/3 मतों में पारित होगा। यदि आवश्यक हुआ तो संस्था के हित में उसके पंजीकृत विधान में संशोधन करने का अधिकार पंजीयक, फर्म्स एवं संस्थाए को होगा जो प्रत्येक सदस्य को मान्य होगा। संस्था के विधान में संशोधन हेतु प्रस्ताव मय-नियत प्रारूप शुल्क सहित प्रस्तुत की जायेगी ।

4. विघटन -

संस्था का विघटन साधारण सभा के कुल सदस्यों के 3/5 से पारित किया जावेगा । विघटन के पश्चात् संस्था की चल तथा अचल सम्पत्ति किसी समान उद्देश्यों वाली संस्था को सौंप दी जावेगी। उक्त समस्त कार्यवाही अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार की जावेगी ।

5. सम्पत्ति -

संस्था की समस्त चल-अचल सम्पत्ति संस्था के नाम से रहेगी । संस्था की अचल सम्पत्ति (स्थलवार) रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं की लिखित अनुज्ञा के बिना विक्रय द्वारा दान द्वारा या अन्यथा प्रकार से अर्जित या अंतरित नहीं की जा सकेगी एवं उक्त हेतु नियत शुल्क संस्था द्वारा जमा की जायेगी।

6. बैंक खाता -

संस्था की समस्त निधि राष्ट्रीय बैंक या पोस्ट आफिस में खोला जायेगा एवं समय-समय पर धन निकालने व जमा करने की प्रक्रिया जारी रहेगी ।

7. पंजीयक द्वारा बैठक बुलाना -

संस्था की पंजीयक नियमावली के अनुसार पदाधिकारियों द्वारा वार्षिक बैठक न बुलाये जाने पर या अन्य प्रकार के आवश्यक होन पर पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाए को बैठक बुलाने का अधिकार होगा। साथ ही यह बैठक में विचारार्थ विषय निश्चित कर सकेगा ।

8. विवाद -

संस्था में किसी प्रकार के विवाद की स्थिति होने पर अध्यक्ष को साधारण सभा की अनुमति से सुलझाने का अधिकार होगा। यदि इस निश्चित या निर्णय से पक्षों पर संतोष न हो तो वह रजिस्ट्रार की ओर के निर्णय के लिए भेज सकेंगे। रजिस्ट्रार का निर्णय अन्तिम व सर्वमान्य होगा । संचालित सभाओं के विवाद अथवा प्रबंध समिति के विवाद उत्पन्न होने पर अन्तिम निर्णय देने का अधिकार राजिस्ट्रार को होगा।